BLUNT बातचीत विद राइटर- सार्थक सागर…

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१. अपने बारे में कुछ हमारे पाठकों को बताईये, लेखन की शुरुआत करने से पहले आप क्या किया करते थे I

मैं मधुबनी का रहने वाला हूँ। प्रारंभिक शिक्षा यहीं से हुई, फिर निफ्ट से फैशन टेक्नोलॉजी में स्नातक किया। लेखन और पढ़ाई साथ-साथ चलती रही। लिखने की शुरुवात कक्षा 7 में हुई, फिर यह सिलसिला चल रहा है। एक लेखक के लिए लिखना खाना खाने जैसा है, रोज़ थोड़ा तो ज़रूरी है।


२.आपकी अभी तक कौन-कौन सी पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, थोड़ा अपनी पुस्तकों के बारे में बताईये I 

मेरी किताब “कुछ लफ़्ज़ तुम्हारे नाम” 2018 में प्रकाशित हुई थी। यह एक कविता संग्रह है।संग्रह में ज्यादातर प्रेम से जुड़ी कविताएं हैं, प्रेम मेरे हिसाब से ऐसा विषय है जो था और रहेगा। हर इंसान कहीं न कहीं इससे जुड़ पाता है। प्रेम में इंसान हर प्रकार भी भावनाओं से भरा रहता और इन्हीं भावनाओं को मैंने आकार देने की कोशिश की है।


३. पहली पुस्तक छपवाना कितना मुश्किल था और छपने के बाद के अहसास के बारे में बताईये I 

जब लिखना शुरू किया था तो कभी यह सोचा नहीं था कि प्रकाशित भी करवाना है। कॉलेज में जाने के बाद वहां लिटरेरी क्लब से जुड़ा, तीसरे साल में क्लब प्रेसिडेंट हो चुका था , वहीं पहली बार कॉलेज की पत्रिका के लिए एक कविता लिखी थी। कविता पसंद की गई, और फिर दोस्तों के कहने पर जो लिख रखा था उसका संकलन कर प्रकाशकों को भेजना शुरू किया।
एक नए लेखक के लिए पहली पुस्तक छपवाना पहली बार पहाड़ चढ़ने जैसा होता है। डर भी होता है, और ऊंचाई पाने की चाहत भी। इस यात्रा में ज्यादातर आपके पास कोई दिशा दिखाने वाला नहीं होता। कुछ ऐसा ही था मेरे साथ भी, लिखने के बाद कई प्रकाशकों को पांडुलिपि भेजी ।

कुछ ने जवाब दिया, कुछ ने नहीं ,मगर शिद्दत से चाहो तो सब हो जाता है। जवाब मिला और किताब आपके सामने है। जब किताब सामने थी, तो ऐसा लग रहा था उस पहाड़ को चढ़ने की प्रकिया पूरी हो चुकी है। ऊपर और भी कई चोटियां दिख रही थी चढ़ने को, हाँ मगर पहला मुकाम मिल चुका था। पहली किताब साइन करते वक़्त मेरे हाथ कांप रहे थे।

४. आपकी कौन सी क़िताब का करैक्टर/लाइन आपको सबसे प्रिय है और आख़िर क्यूँ I मेरी कविता की एक पंक्ति है “बहती गंगा सी कहानी है इश्क़ की, कोई कितना लिखे कोई कितना सुनाए”यह अपने आप में मुझे लगता है सब समाहित किए है। जब  हिमालय से गंगा निकलती है तो बिल्कुल उछल- कूद करती, धीरे-धीरे प्रवाह स्थिर होता है । इस स्थिरता के क्रम में कई नदियां उससे मिलती हैं । इश्क़ भी ऐसा ही है, बहुत उथल-पुथल के बाद स्थिर होता है।

५. कोई नया लेखक अपनी पहचान कैसे बनायें I 

पहचान बनाने की प्रकिया बहुत लंबी है। पहली पहचान तो ख़ुद से होती है, और यह ख़ुद को जानने की प्रकिया चलती रहती है। दुनियां आपको जाने उससे पहले खुद को जानना आवश्यक है। ख़ुद को जितना बेहतर जानेंगे, लेखन में उतना निखार आएगा। जब आप ख़ुद को तराश लेंगे तो आपकी चमक अपने आप पहचान दे देती है। ज़रूरी है भीड़ में निखर कर आना।पहचान बनाने का कोई शॉर्टकट नहीं होता, निरंतरता और बेहतर करने की इच्छा ही एक दिन पहचान देती है।

६. आप किस नई क़िताब पर काम कर रहे हैं, पाठकों के लिए संदेश I      

फ़िलहाल एक कहानी संग्रह पर काम कर रहा हूँ , उम्मीद है जल्द आएगी। मैं जल्दबाजी में कुछ भी नहीं करना चाहता। हर साल एक किताब वाली होड़ नहीं है , बस जो भी हो अच्छी हो ।

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