BLUNT बातचीत विद राइटर- अनघ शर्मा …

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1.अपने बारे में कुछ हमारे पाठकों को बताईये, लेखन की शुरुआत करने से पहले आप क्या
किया करते थे I

उत्तर- मेरा जन्म पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद में हुआ है, जो आगरा के पास का एक छोटा व्यावसायिक शहर है| स्कूल की पढाई मैंने वहीं फ़िरोज़ाबाद सी की और उसके बाद ग्रेजुएशन
करने के लिए मैं कर्नाटक चला गया| लिखना तो 97-98 में जिन दिनों स्कूल में था तभी शुरू
हुआ, पर मुझे लगता है कि तब बहुत खराब लिखा करता था मैं|

तब नज्में- ग़ज़लें जैसा कुछ लिखा करता था और सोचता था कि क्या कमाल लिखा है जोकि धीरे-धीरे बाद में समझ में आया की बहुत अच्छा नहीं लिखा गया है| इस तरह उस लीक को छोड़ कर मैंने प्रोज़ लिखना शुरू किया|

कहानियां भी मुकम्मल तौर से २००६ के बाद लिखनी शुरू कीं, हालाँकि तब तक मैं “शिवजा” नाम का एक लघु-उपन्यास लिख चुका था जिसे बाद में कभी उसके पहले ड्राफ्ट के आगे नहीं बढ़ाया| तो अगर कुल जमा समय मानें तो लिखते हुए कोई बीस एक साल हुए हैं मुझे|

२.आपकी अभी तक कौन-कौन सी पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, थोड़ा अपनी पुस्तकों के बारे में
बताईये I 

उत्तर-साल 2019 में मेरा कहानी संग्रह “धूप की मुंडेर” ‘राजकमल-प्रकाशन’ से प्रकाशित हुआ था| ये मेरी पहली ही पुस्तक है और इसमें ह्यूमन-इमोशंस की बारह अलग-अलग कहानियाँ हैं,
जिनमें प्रेम, स्नेह, द्वेष जैसे जीवन के सभी शेड्स हैं|

फिर भी अगर कोई पाठक इन्हें मुकम्मल तौर पर देखे तो ये कहानियाँ प्रेम और उससे बाद की ख़ाली बची जगह में ज़िंदा रहने की ज़द्दोज़हद की कहानियाँ हैं| इन कहानियों में धोखा देते प्रेमी हैं, लीक से आगे बढ़ जीवन को गले लगाती स्त्रियाँ हैं और सब झटक कर नए सिरे से जीने की चाह रखती नायिकाएं भीं हैं|


३. पहली पुस्तक छपवाना कितना मुश्किल था और छपने के बाद के अहसास के बारे में बताईये I

उत्तर- पहली किताब के स्वीकृत होने और छपने में मुझे कोई दिक्कत नहीं महसूस हुई| मैंने एक दिन राजकमल प्रकाशन के सम्पादकीय विभाग में ई-मेल के माध्यम से एक सिनोप्सिस और दो
कहानियाँ भेजी और अपने लिखने के तमाम अनुभवों को उनसे साझा करते हुए ये इच्छा जताई
कि मैं चाहता हूँ कि वह लोग मेरे काम को एक बार देखें और अगर मुमकिन हो तो किताब को
प्रकाशित करने के विषय में सोचें|

तीन चार दिन के बाद ही मुझे वहाँ से एक स्वीकृति का पत्र आ गया| ये स्वीकृति मेरे लिए बड़ी और मॉरल बूस्ट करने वाली चीज़ थी कि इतने बड़े प्रकाशन गृह से स्वीकृति मिली है किताब के लिए| किताब आने के बाद का अनुभव बहुत मिला-जुला था|

मेरे सीनियर्स, मेरे समकालीन दोस्तों ने बहुत खुले दिल से पढ़ा और सराहा इस किताब को| जब
पहले-पहल किताब छप कर आई थी तो मुझे लगता था कि सब पढ़ें, सब बात करें इन कहानियों
पर जो कि मुमकिन नहीं| फिर यूँ भी किताबें अपनी गति, अपना रास्ता खुद तय करतीं हैं|
किताब आने के बाद में शुरू-शुरू की जो बेचैनी होती है वह धीरे-धीरे खुद खत्म हो जाती है|

फिर किताब को जब-जब कोई पाठक पढ़ता है वह लेखक को अनुभव से समृद्ध ही करता है चाहे
आज हो या दस बरस बाद| अंततः लेखक हर अनुभव को, किताब पर की गयी हर बात को
चेरिश करता है| अपने काम को चेरिश करने से बड़ी चीज़ क्या|
 
४. आपकी कौन सी क़िताब का करैक्टर/लाइन आपको सबसे प्रिय है और आख़िर क्यूँ I

उत्तर- यूँ तो हर करैक्टर, हर चरित्र मैंने ख़ुद ही बनाया है इन कहानियों में तो सब ही मेरे अपने हैं पर फिर भी मेरी दो कहानियों “एक बालिश्त चाँदनी” की ‘चम्पा’ और “शाहबलूत का पत्ता” की
‘जुगनू’ बहुत प्रिय हैं, ये दोनों चरित्र कोई सात एक साल तक लगातर मेरे साथ सोते जागते रहे
और मुझे इन कहानियों को पूरा करने के लिए कम्पेल करते रहे|

मेरी कहानी शाहबलूत का पत्ता में आईं ये दो पंक्तियाँ बहुत प्रिय हैं मुझे…..
“ऐसी कोई शाख़ ही नहीं जो बारिश के बाद काँपे और एक बूंद भी न छटके|”
“जिंदगी का असासा शाहबलूत की सुर्खी से ले झील की चाँदी के बीच डोलता रहता है|”

५. कोई नया लेखक अपनी पहचान कैसे बनायें I

उत्तर- ये बहुत मुश्किल प्रश्न है उत्तर देने के लिए, इस पर बात करना ठीक ऐसा है जैसे “सईद राही”
ने अपनी एक ग़ज़ल में कहा है…

“हमें सब्र करने को कह तो रहे हो/ मगर देख लो, ख़ुद ही घबरा रहे हो|” चूँकि पहचान बनने वाली जो बात है वह हर लेखक के लिए उसके अपने निजी रिफ्लेक्शन पर डिपेंड करती है| किस एक चीज़ को एक लेखक पहचान की स्वीकृति के तौर पर लेगा वह दूसरे से बिलकुल भिन्न हो सकती है|

फिर भी अगर जर्नलाइज करके कहा जाये तो लेखक को अपने काम से लगातर जुड़े रहना चाहिए, ईमानदार बने रहना चाहिए अपने लिखने को ले कर|

ख़ूब पढ़ना, गुनना और साथियों को सुनना चाहिए और फिर देखना चाहिए कि अपनी शैली को कैसे बेहतर किया जा सकता है; और अपनी बनाई परिधियों को खुद ही लांघना चाहिए| धीरे-धीरे पहचान बनेगी,ज़रूर बनेगी|


६. आप किस नई क़िताब पर काम कर रहे हैं, पाठकों के लिए संदेश I     
उत्तर- अभी इनदिनों मैंने अपनी दूसरी किताब की पाण्डुलिपि पूरी की है| ये भी कहानियों की किताब रहेगी| मुझे उम्मीद है कि जब ये किताब आएगी तो पाठकों को पसंद आएगी|

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