सरकार द्वारा हाल में मशहूर मोबाइल गेम PUBG बैन,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल संवैधानिक अधिकार को सीमित करने का प्रयास है

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सरकार द्वारा हाल भी मशहूर मोबाइल गेम PUBG को बैन कर दिया है !

विदेशी ऍप्लिकेशन्स पर बैन असल में लोकतांत्रिक ढाँचे पर खतरा है। इससे जनता के विरोध की आवाज को दबाया या नियंत्रित किया जा सकता है।

विदेशी एप्प्स पर सरकार का नियंत्रण नहीं होता इसलिए उनके कंटेंट्स को सरकार मॉनिटर तो कर सकती है मगर रेगुलेट नहीं कर सकती।

आपको याद होगा कि किस तरह एक तंत्रीय चीन ने गूगल आदि तमाम विदेशी IT कंपनियों को अपने देश में ब्लॉक किया हुआ है।

यहाँ एक और सवाल उठता है कि PUBG लिस्ट में क्यों है जबकि PUBG दक्षिण कोरियाई कंपनी है और इसका ग्लोबल वर्ज़न खुद चीन में प्रतिबंधित है।

दरअसल इसके पीछे के दर्शन को समझा जाएं तो अभी कुछ पेरेंट्स जो अपने नाबालिग़ बच्चों के PUBG खेलने से परेशान हैं वो PUBG ब्लॉक करने के सरकार के कदम से खुश हो जाएंगे,ध्यान देने वाली बात यह है कि इन पेरेंट्स की उम्र 30 से 45 के बीच की है! तो क्या सरकार ने इस तरह से एक तबके को खुश करने की कोशिश की है |

इस तरह सरकार PUBG को प्रतिबंधित एप्प्स की लिस्ट में डाल कर, युवा माता-पिताओं को खुश कर रही है और मौजूदा असल मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है,जिससे आम जन के विरोध की आवाज़ को कमजोरहो सकती है|

क्या इस तरह के कदम लोकतांत्रिक संस्थानों को एक तंत्रीय ढाँचे में बदलने के लिए छुपा हुआ मगर अचूक हथियार तो नहीं ?

क्या ये सरकार द्वारा उठाया यह कदम सीधे सीधे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल संवैधानिक अधिकार को सीमित करने का प्रयास है।

ये लेख Ashwani kumar जी ने लिखा है,ये लेखक के अपने विचार है

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