“You are the writer of your own life”

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जिंदगी , वो कौन है जो इसे चलाए रखता है ?जवाब है “वजह”,जी हाँ एक “वजह” ही होती है इस जिंदगी को चलाए रखने वाली । जब तक ये वजह हमारी जिंदगी में होती है तब तक हम खुश रहते हैं ,मुस्कुराते हैं , गुनगुनाते हैं और झूमते हैं ।

हर दिन ऐसे चलता है मानो किसी फिल्म का ख़ुशनुमा सीन हो और बैकग्राउंड में ख़ुशनुमा धुन बज रही हो । हर गुजरा हुआ लम्हा यूँ लगता है मानो दिल के लिए एक नया एहसास हो और वो इस लम्हे को हमेशा के लिए अपने पहलू में समेट लेना चाहता हो ।।

लेकिन जिस वक्त ये “वजह” हमारी जिंदगी से गायब होती है ना उसी वक़्त से शुरू होता है जिंदगी का वो सफ़र जो शायद अकेले काटने के लायक नहीं होता ।।इसके बाद हर लम्हा यूँ लगता है मानो हमें काटने को दौड़ रहा हो । हर गुजरता लम्हा दिल में एक चुभन छोड़ता हुआ जा रहा होता है साथ में दे जाता है एक कसक ,जो शायद कभी मिट नहीं पाती ।

हर दिन बेजान सा महसूस होता है जैसे इस जहान में  कुछ नया बचा ही ना हो। ऐसा लगता है मानो सबकुछ ठहर से गया हो , मानो किसी ने जिंदगी पर फुलस्टॉप लगा दिया हो ।मगर ये जरूरी है कि जिंदगी का सफ़र चलता रहे क्योंकि ये सफ़र बड़ी मुश्किल से नसीब होता है ।

जिंदगी की यह “वजह” खत्म न हो इस के लिए जरूरी है कि आप अपनी जिंदगी की “वजह” खुद बने , हर पल खुद के साथ रहे , खुद को प्रियॉरिटी दें और हर वक़्त ख़ुद हौंसला दें । 

किसी के कहे सुने में भरोसा न करें क्योंकि “You are the writer of your own life”.वो सावन कुमार जी ने लिखा है ना- ज़िन्दगी एक पहेली भी हैसुख-दुःख की सहेली भी है ज़िन्दगी एक वचन भी तो है जिसे सब को निभाना पड़ेगा ज़िन्दगी प्यार का गीत हैइसे हर दिल को गाना पड़ेगा ।।
तो साथ निभाते रहिए और गुनगुनाते रहिए ।।राम राम सा । ख़ुदा हाफ़िज़ । टेक केयर ।।

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