सफ़ेद कॉलर अपराध

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(यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक हैं, इस कहानी के द्वारा किसी भी धर्म, व्यक्ति या समुदाय को ठेस पहुंचाने की सोच नहीं रखी गयी हैं।)

घसिटाराम, अपनी दिनचर्या से बहुत खुश था। पैसे चाहे ना हो पर मुस्कान और जिंदादिल अरमान उसे सबसे अमीर बनाये रखते थे।  उसकी सम्पति में 4 मुर्गिया, एक बकरी, टुटा लौहे का बक्सा, एक फूस की छत और फटे तिरपाल का दरवाज़ा था

जब घसिटाराम की उम्र 6 वर्ष थी, तब किडनी में तकलीफ बताकर डॉक्टर ने उसकी माँ को भर्ती किया था और 2 दिनों बाद उसकी माँ की मृत्यु हो गई थी। घसिटाराम के पिता इस सदमे को झेल ना सके और कुछ ही दिनों में वह भी स्वर्ग सिधार गए थे। मुसीबतो का बोझ, कम उम्र और जीने की संघर्षपूर्ण ललक ने घसिटाराम को कड़े हालातो से रूबरू करवाया।

बचपन के दिनो से अल्हड जवानी तक घसिटाराम संघर्षो का सामना करता रहा और आगे बढ़ता रहा। बचपन के दिनों में गांव के एक बड़े सेठ की बकरियों को चराने दौरान उसने सोचा था कि बड़ा बनने पर वह खूब सारी बकरिया, भेड़ और गाय पालेगा।  उनको जंगल में चराने ले जायेगा, सुबहशाम दूध बेचकर पैसा कमायेगा।

घसिटाराम अब लगभग 22 साल का गबरू युवा हो चूका हैं। उसके दोस्त पिंकी, चिंकी, मिना ,रीना और शैतान टिंकू हैं।  शुरुवाती चार नाम उसकी मुर्गियों और टिंकू बकरी के बच्चे का नाम हैं।  एकांत में रहकर गुजर बसर करने वाला घसिटाराम अपनी मुर्गियों और बकरी के इर्दगिर्द ही जीवन को समेट कर रखे हुए हैं। सुबह शाम प्रभु के सामने तेल का दीपक जलाकर वह इस खूबसूरत जीवन के लिए नियमित धन्यवाद ज्ञापित करता था।

बरसात के दिन जा रहे हैं और गुलाबी सर्दी ने दस्तक देना शुरू ही किया था। घसिटाराम एक दिन सामान्य जुखाम की दवा लेने के लिए एक निजी अस्पताल जाता हैं। वहां पर उसकी मुलाकात डॉक्टर जॉर्डन से होती हैं। डॉक्टर जॉर्डन घसिटाराम पर प्रेम और स्नेह की बरसात करता हैं। अचानक मिले इस प्रेम और सम्मान से घसिटाराम गदगद हो उठता हैं। डॉक्टर जॉर्डन धीरे धीरे घसिटाराम से संपर्क स्थापित करता हैं।  वह उसकी टूटी झोपडी की मरम्मत करवाता हैं, तिरपाल के फटे दरवाज़े की जगह लकड़ी का दरवाज़ा लगवाता हैं। डॉक्टर जॉर्डन अब घसिटाराम के लिए पहनने को कपडे और सोने के लिए नया गद्दा लाता हैं। अपने ऊपर हुई एकाएक इस मेहरबानी से घसिटाराम को आश्चर्य होता हैं।

घसिटाराम मन ही मन खुश होता हैं, उसे लगता हैं की डॉक्टर जॉर्डन के रूप मे उसे भगवान मिल गए हैं।

डॉक्टर जॉर्डन का घसिटाराम के घर आना अब आम था। पिंकी, चिंकी, मिना ,रीना और शैतान टिंकू भी डॉक्टर जॉर्डन के कदमो की आहट को पहचानने लगे थे। सिर्फ घसिटाराम के दिन ही नहीं, कुछ और भी बदला था।

मंदिर के दीपक की जगह अब मोमबत्ती ने ले ली थी, धार्मिक किताबो की जगह अब दूसरी पुस्तक थी, गले में काले धागे में  लिपटे ताबीज की जगह दूसरा चिन्ह गया था।  अनेको दफा रामराम का जिक्र करने वाला घसिटाराम अब बातबात परओह माय गॉडका उच्चारण करता था। डॉक्टर जॉर्डन लगातार घसिटाराम को उपदेश देता था कि मोमबत्ती जलाने और दूसरी पुस्तकों के अध्ययन मात्र से उसके जीवन में क्रांतिकारी बदलाव रहे हैं।

घसिटाराम अब डॉक्टर जॉर्डन को ईश्वर का रूप मानकर निरंतर उसके सम्पर्क में रहता था।

चुकी महीना नवंबर का था और सर्दियों की शुरुवात हो चुकी थी। ऐसे में, मौसमी बीमारियों से जूझते हुए घसिटाराम पुनः डॉक्टर जॉर्डन के अस्पताल में जाता हैं।घसिटाराम की कुछ जांच करने के बाद डॉक्टर जॉर्डन उसे अस्पताल में भर्ती कर लेता हैं। घसिटाराम बेफिक्र होकर डॉक्टर जॉर्डन पर विश्वास करके अस्पताल  में भर्ती होता हैं।  इस बार डॉक्टर जॉर्डन एक और ऑपरेशन करता हैं।  सामान्य मौसमी बीमारी के इलाज के लिए ऑपरेशन की बात अटपटी जरूर है लेकिन घसिटाराम अब डॉक्टर जॉर्डन पर विश्वास करके ऑपरेशन के लिए सहमति देता हैं। 

होश आने के बाद घसिटाराम अपने को किसी अनजान शहर के बीचो बीच कचरे के ढेर में पड़ा पाता हैं।  पेट में उठ रहे दर्द से परेशान होकर देखने पर  भोचक्का रह जाता हैं।  घसिटाराम की किडनी के ठीक ऊपर एक बहुत बड़े चीरे के निशान से रक्त बहता दीखता हैं। घसिटाराम इस बात से अनजान है कि यह वही डॉक्टर जॉर्डन है जिसने उसकी स्वर्गीय माँ की किडनी का इलाज किया था।  बहते रक्त की तेज़ धार में घसिटाराम की दिमाग पर बिजली सी गिरती हैंअचानक से उसे उसके पिता के अंतिम शब्द ध्यान आते है जब उसके पिता कहते है की उसकी माँ सामान्य खांसी के इलाज के लिए गई थी और तब डॉक्टर ने किडनी की खराबी होने की बात कहकर किडनी का ऑपरेशन कर दिया था।

तेज़ दर्द की लहरों के बीच घसिटाराम के शरीर से उसकी किडनी चुरा ली गई थी, घसिटाराम से उसके दोस्त पिंकी, चिंकी, मिना ,रीना और शैतान टिंकू भी कौसो दूर थे, दूर था उसके घर का दरवाजा, दूर था प्रभु का दीपक, दूर थी धार्मिक किताबे और दूर था वो सपना जो उसने गायबकरी के दूध को बेचकर अमीर बनने का सोचा था।

अब घसिटाराम नज़दीक था अपनी मृत माँ के, स्वर्गीय पिता के, घसिटाराम नजदीक था कभी ना उठने वाली एक लम्बी नींद के, घसिटाराम नज़दीक था मृत्यु के।अंतिम क्षणों में उसने यही सोचा कि उसके दोस्त पिंकी, चिंकी, मिना ,रीना और शैतान टिंकू अब अनाथ हो जायेगे बिलकुल वैसे जब वह 6 वर्ष की उम्र में अकेला था। 

घसिटाराम अब स्वर्गीय घसिटाराम हो चूका था। गले में बंधी काली डोरी से लिपटे चिन्ह को देखकर नगर पालिका ने  जलाने के बजाए अनजान शहर के अनजान कब्रिस्तान में दफनाना उचित समझा।  और इस तरह सफ़ेद कॉलर पहने व्यक्ति ने एक और शिकार को अंजाम दिया।

लेखक परिचय

शुभम शर्मा पेशे से प्रोफेशनल सामाजिक कार्यकर्त्ता, देश के 23 राज्यों के 101 से अधिक शहरों की यात्रा, मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय एवं राज्य मंत्रियो, नौकरशाहों के साथ संग्लन रहकर सकारात्मक चर्चाओं पर बल देते रहे हैं संग्राहलय विरासत संरक्षण और सामाजकार्य अध्धयन तक की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं I 

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