बेटी नहीं होगी तो, ये दुनिया कैसी होगी

Spread the love

आज की कहानी खुद में एक कहानी है जिसे आज तक कोई समझ नहीं पाया. दरअसल ये हमारी ज़िन्दगी का वो  हिस्सा है जो हमारे दिल के कोने में कही छुपा के हमने दफ़न कर दिया है ये आज के समाज की एक ऐसी कड़वी सच्चाई है जिसे कोई भी समझना नहीं चाहता

एक ऐसी बीमारी जो कोरोना से भी भयंकर है कुछ दिनों में हम करोड़ों खर्च करके इसका इलाज तो ढूंढ लेंगे मगर इस बीमारी का इलाज ढूँढना उतना ही मुश्किल है,

दोस्तों आज हम हर घर में पल रही एक कहानी पढ़ेंगे, लेकिन उस से पहले मेरा आप सब से एक सवाल है, जो मैं चाहता हूँ जब आप इस लेख को पढ़ रहे हो तो वो आप खुद से पूछे और खासकर आज की युवा पीढ़ी जरूर अपने अंतर्मन को एक बार  झाँक के देखे।

 

हमे, माँ चाहिए

हमे, बहन भी चाहिए

हमे, गर्लफ्रेंड चाहिए

हमे, बीवी भी चाहिए

तो हम सब को इन्ही का एक प्रतिरूप बेटीक्यों नहीं चाहिए ?

 

क्यों ये समाज जितना आगे बढ़ रहा है उतना ही इस बात को लेके पीछे जाता जा रहा है.

क्या हमने कभी खुद से ये पूछा अगर बेटी नहीं होगी तो, ये दुनिया कैसी होगी?

खैर, इन सब से परे और इस पुरानी बीमारी का उपचार कुछ हस्तियों ने हर वक़्त इस समाज को दियाजैसे की आप सभी ने सुनी होगी और देखी भी होगी कुछ बहुप्रसिद्ध चल चित्र जो इन सब रूढ़िवादी विचार धाराओं के परे अपनी एक नयी पहचान बनाने में कामयाब हुए और सबको एक आइना भी दिखाया की. जैसे

कल्पना चावला

नीरजा

गुंजन सक्सेना

इन सब को देख के हमारा मन क्यों नहीं करता जब एक लड़की अपने जीवन के सबसे अहम दौर में अपना कदम रखती है और जीवन देने वाली जननी बनती है तो उसके  मन में पहला ख्याल ये क्यों नहीं आता की उसके उपवन में खिलने वाला पहला फूल महकहो न की मयंक

ठीक वैसे ही जब एक लड़का अपने जीवन के सफर में जिम्मेदारी की एक और कड़ी पहनता है तो वो क्यों नहीं सोचता वो पहली कड़ी अद्विकाहो न की अद्विक

यहाँ बात सिर्फ ये सोचने की नहीं बल्कि बेटी को लेके सपने सजाने की है, एक बेटी ही है जो जब तक आपके घर में रहती है तब आपके घर को महकाती है और जब आप की दी हुयी यादें, बातें, और नसीहत को अपना बना के दूसरे के घर जाती है तो आप का ही नाम बढाती है,

क्या हम एक बार उनके साथ अपना आने वाल कल देख सकते है, क्या हम पानी का गिलास बेटी से नहीं एक बार अपने बेटे से मांग सकते है, क्या हम उसके मन आ रहे सवालों का जवाब खुद बन सकते है,

क्या हम उनको नीले आकाश में उड़ने के लिए पंख लगा सकते है ?

 

हैं बहुत सी ख्वाइशें उसके मन में भी,’

एक बार टटोल के तो देख;

खुद बिछ जाएगी की तेरी राहों पे,

एक बार उसे प्यार से बेटी बोल के तो देख

 

न समझ उसे तू बोझ अपना,

है वो नीव तेरे जीवन की;

उठा देगी तेरा सर इस जहाँ में,

एक बार तो हौंसला उसे दे के तो देख

Related posts

Leave a Comment