“ख़ामोशी भी प्यार की ज़बान होती है” –बर्फी

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प्यार का इज़हार करने का तरीका हर इन्सान का अलग-अलग होता है। कोई सब कुछ बोल देता है तो कोई सब कुछ लिखकर अपना प्यार जताता है। किसी के साथ रहने भर से प्यार का एहसास हो जाता है। ठीक वैसे ही “ख़ामोशी” भी इज़हार करने का एक तरीका है। मतलब कितना रोमांटिक होता है ना कुछ ना कहकर भी सब कुछ कह जाना।

ऐसी ही एक “ख़ामोश” लेकिन “खूबसूरत” कहानी के बारे में बताने जा रहा हूँ। साल 2012 में एक बड़ी खूबसूरत फ़िल्म “बर्फी” आई। जो आज तक मेरे दिल में एक अलग जगह बनाये हुए है। इस फ़िल्म का लेखन और डायरेक्शन का काम “अनुराग बासु” ने किया है। फ़िल्म में कमाल के गानों को “प्रीतम दा” ने संगीत दिया है।

फ़िल्म में रणबीर कपूर, प्रियंका चोपड़ा और इलियाना डिक्रूज जैसे बेहतरीन कलाकार हैं। इस फ़िल्म के जरिये इलियाना ने अपने बॉलीवुड के सफ़र की शुरुआत की है।

“आला आला मतवाला बर्फी
रातों का है ये उजाला बर्फी”

वैसे तो इन दो लाइनों से आप इस पूरी फिल्म को परिभाषित कर सकते हैं। एक लड़का जो पैदा होने के समय से ही ना तो बोल सकता है और ना ही सुन सकता है। लेकिन वो फिर भी बेफिक्र होकर अपने अंदाज में ज़िन्दगी जीता है। ज़िन्दगी जीता ही नहीं बल्कि लोगों को भी खुद से मुहब्बत करवा लेता है।

कहानी की शुरुआत सर्दियों की ओस में ढँके शहर “दार्जीलिंग” से होती है। जहाँ “बर्फी”(रणबीर कपूर) को पहली ही नज़र में “श्रुति”(इलियाना) से प्यार हो जाता है। वो हिम्मत करके अपना दिल उसके सामने सजा देता है माने प्रपोज़ कर देता है। “श्रुति” की पहले से ही सगाई हो रखी है। इसलिए वो ‘बर्फी’ की मुहब्बत ठुकरा देती है।

इस फ़िल्म का ये सीन मुझे बेहद पसन्द है जहाँ ‘बर्फी’ एक ख़त ‘श्रुति’ को भिजवाता है। उसमें लिखा होता है कि “मैं वक़्त को पन्द्रह मिनट पीछे कर रहा हूँ। हम-तुम मिले नहीं है और ना ही मैंने तुम्हें प्रपोज़ किया है। अब हम दोस्त बनकर सब शुरू से स्टार्ट करेंगे। अगर तुम राज़ी हो तो अपना हाथ हिला देना।” ‘श्रुति’ से इशारा मिलते ही ‘बर्फी’ खुश होकर कुलाँचे मारने लगता है।

हम इन्सान जब भी बहुत ज्यादा खुश हो जाते हैं तब हमें ये नहीं पता होता कि इतनी खुशी सम्भाली कैसे जाए। जब भी “हिरन” बहुत ज्यादा खुश होता है तो वो अपनी खुशी कुलाँचे मारकर ज़ाहिर करता है। ठीक उसी तरह जब हम इन्सान भी खुश होते हैं तो कुलाँचे मारने लगते हैं। इन्सान भी खुशी में “हिरन” बन जाता है।

कहानी आगे बढ़ती है ‘श्रुति’ को पता नहीं चलता कि बात कब दोस्ती से आगे बढ़ चुकी है। वो ‘बर्फी’ से प्यार करने लगती है लेकिन उसकी वो सगाई की अँगूठी उसके लिए बेड़ियों का काम करती है और उसे रोक लेती है।

‘बर्फी’ एक बार फिर रिश्ता माँगने ‘श्रुति’ के घर जाता है। इस दफ़ा वो खुद ही वापिस बाहर आ जाता है और उसके पीछे पीछे ‘श्रुति’ भी आ जाती है। वो ‘श्रुति’ को समझाते हुए रो देता है। तभी बारिश शुरू हो जाती है। उसका छाता नहीं खुलता है और वो दिल में दर्द दबाकर भीगता हुआ लौट जाता है।

बारिश के भी मायने हम अपने हिसाब से बदल देते हैं। जब प्यार में होते हैं तो बारिश अच्छी लगती है और हम उन बूँदों को बरसते हुए बड़े ही खुशी से आँखें बंद करके महसूस करते हैं। लेकिन जब वही बारिश हिज़्र के वक़्त हो रही हो तब हम कहते हैं कि ये आसमान भी जुदाई में रो रहा है। हम उससे बचने को छाता रूपी एक आँचल तलाश करते हैं और उस वक़्त वो आँचल भी नहीं मिलता। हम इस तरह खुद की बेबसी में ही भीग कर रह जाते हैं।

‘श्रुति’ के जाने के बाद ‘बर्फी’ की ज़िंदगी में ‘झिलमिल'(प्रियंका चोपड़ा) आती है। वो बहुत ही नाज़ुक होती है और ‘ऑटिज़्म’ नाम की बीमारी से ग्रसित होती है। ‘बर्फी’ और ‘झिलमिल’ दोनों ही कोलकाता निकल जाते हैं। जहाँ वो ‘झिलमिल’ का एक टेस्ट लेता है। जिसमें वो पास हो जाती है। ‘बर्फी’ समझ जाता है कि यही वो लड़की है जिसके साथ वो पूरी ज़िंदगी गुज़ार सकता है। दोनों एक दूसरे का ख़्याल रखते हुए साथ रहने लगते हैं।

लगभग छह महीने बाद ‘श्रुति’ को ‘बर्फी’ मिलता है, जो कि पहले से बहुत खुश है। ‘श्रुति’ का ‘बर्फी’ के लिए प्यार एक बार फिर जाग उठता है। लेकिन वो ‘बर्फी’ को ‘झिलमिल’ के साथ खुश देखकर सब कुछ समझ जाती है की जिससे आप मुहब्बत करते हो। उसे किसी दूसरे के साथ खुश देखना कैसा होता है। तभी बैकग्राउंड में एक गाना बजता है। जिसके बोल कुछ इस तरह से हैं।

“करते हैं हम आज क़ुबूल क्या कीजे
हो गयी थी जो हमसे भूल क्या कीजे
दिल कह रहा है उसे मयस्सर कर भी आओ
वो जो दबी सी आस बाकी है”

जब कोई इन्सान हमसे प्यार करता है तो हमें उसे क़ुबूल कर लेना चाहिए। क्योंकि उसे बाद में किसी दूसरे का प्यार जरूर मिल जाएगा। लेकिन तब तक आप ये समझ चुके होंगे कि ये शायद आपकी सबसे बड़ी भूल थी।

“बर्फी” के लिए “काशिफ़ सय्यद” का लिखा ये शेर पढ़ना चाहूँगा।

“मुफ़लिसी थी और हम थे घर के इकलौते चराग़
वरना ऐसी रोशनी करते दुनिया देखती।”

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