राजस्थान की गहलोत सरकार जल्द ला रही है नई पर्यटन नीति,पर्यटन क्षेत्र को पुनः पटरी पर लाने में मिलेगी मदद

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राजस्थान पर्यटन का एक महत्वपूर्ण केन्द्र है। इससे प्रदेश के लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार जल्द ही नई पर्यटन नीति लाएगी। 

प्रदेश में करीब 20 साल बाद लाई जा रही इस पर्यटन नीति से कोविड-19 के कारण संकट का सामना कर रहे पर्यटन क्षेत्र को पुनः पटरी पर लाने में भी मदद मिलेगी।  

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने निवास पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पर्यटन विभाग की समीक्षा की  साथ ही उन्होंने पर्यटन विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों से भी संवाद किया और पर्यटन को गति देने के लिए उनके सुझाव भी जाने। 

राजस्थान के मेले एवं उत्सव,राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर हैं,इसलिए इसे पुनः पटरी पर लाने के लिए सरकार नई पर्यटन नीति ला रही है जिसमें ज्यादा से ज्यादा देशी एवं विदेशी पर्यटक इनसे जुड़ सकें,इसके लिए इन्हें एक नया रूप दिया जाएगा। 

इसमें पुष्कर मेला, डेजर्ट फेस्टिवल, कुंभलगढ़, बूंदी उत्सव सहित अन्य मेलों एवं उत्सवों की नए सिरे से ब्रांडिंग की जायेगी साथ ही इनमें नई सोच के साथ ऎसी गतिविधियाें को शामिल किया जाएगा, जिनसे पर्यटक आकर्षित हों।
 
राजस्थान में बड़ी संख्या में प्राचीन एवं पुरामहत्व के धार्मिक स्थल भी हैं। इन प्राचीन और पुरामहत्व के लिए,अधिकारी धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से इन धार्मिक स्थलों के विकास की रूपरेखा को तैयार करेंगे।

वही राजस्थान के भरतपुर के केवलादेव नेशनल पार्क में पानी की समस्या दूर करने के लिए भी स्थायी हल निकाला जाएगा। 

इन पर्यटन स्थलों पर लपकों की समस्या के कारण सैलानियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है और ठगी की शिकायतें भी सामने आती हैं। सरकार इस समस्या के समाधान के लिए प्रभावी ढंग से कार्य करेगी और उन पर कार्यवाही की जाएगी। 
साथ सभी पर्यटन स्थलों पर साफसफाई का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।

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