जज साहब ने ज़मीन पर बैठकर किया न्याय….

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प्रवीण झा:
दिल्ली

भारत विविधताओं से भरा देश हैं I

बड़ा ही क्लिशे स्टार्ट हो गया ना चलो शुरू से शुरू करते हैं, इंडिया इज़ ब्यूटीफुल I
इंडिया इज ब्यूटीफुल इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि भाई सच में हमारा देश बहुत खूबसूरत है बेशक़ हज़ार बातें ऐसी ही जिससे दिल टूट जाता हो लेकिन करोड़ों ऐसी बातें जिससे आईडिया ऑफ़ इंडिया में मेरा यक़ीन कई गुणा बढ़ जाता है I

अपनी बेबाकी के लिए मशहूर सुप्रीमकोर्ट के भूतपूर्व न्यायधीश मार्कंडेय काटजू ने अपने फेसबुक पर एक कहानी सुनाई जिसमें उन्होंने ज़िक्र किया तेलंगाना के भुपल्पल्ली के ज़िला न्यायालय के माननीय न्यायधीश श्री अब्दुल हसीम का I

श्री अब्दुल हसीम न्याय के मंदिर कि मूलभावना को सही मायनों में चरितार्थ करते हुए एक फरियादी महिला के लिए अपनी सीट से उठकर नीचे गए और ज़मीन पर उस महिला के साथ बैठकर उसकी बात सुनी I
जज साहब को उनके कोर्ट क्लर्क ने बताया कि एक महिला उम्र ज़्यादा उम्र होने कि वज़ह से कोर्ट यार्ड के पास बैठ गई हैं और ऊपर आने में असक्षम हैं I उनके वेलफेयर पेंशन से जुड़े केस की सुनवाई यहाँ होनी हैं I

न्यायधीश श्री अब्दुल हसीम उठकर पहले फ्लोर की ओर बढ़ चले महिला की शिकायत सुनी और केस सुनने के बाद उसका फैसला सुना दिया जो केस पिछले 2 साल से पेंडिंग था I

भारतीय न्याय व्यवस्था में मेरा यक़ीन इसी बात से और सुदृढ़ हो जाता है ये सोचकर कि सच में इस देश में जस्टिस काटजू जैसे न्यायधीश बेबाकी से अपनी बात रखने वाले हैं और न्यायधीश श्री अब्दुल हसीम जैसे न्यायधीश अभी भी कोर्ट रूम में डेमोक्रेटिक मूल्यों को बचाए हुए हैं I


जस्टिस मार्कंडेय काटजू साहब ने ख़ुद लिखा कि उन्हें गर्व है की भारत में ऐसे न्यायधीश हैं I

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