अम्मर को तारो हाथ सै कोनी टूटै ।

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14-अगस्त-2020   

इस लेख को लिखते वक़्त मैं इस राजस्थानी कहावत के बारे में सोच रहा था, “अम्मर को तारो हाथ सै कोनी टूटै” जिसका हिंदी में मतलब है कि “आकाश का तारा हाथ से नहीं टूटता” I 

राजस्थान की राजनीति बहुत दिनों से हिलौरे मार रही है और ऐसा लग रहा है जैसे ये तूफ़ान अभी तो नहीं थमने वाला है I पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के झगड़े और मन-मुटाव की वज़ह से कांग्रेस के लिए भारी रहे और इसे सुलझाने के लिए पार्टी हाईकमान को दिल्ली से दखलंदाजी करके मामले को शांत करना पड़ा I

इसके लिए कांग्रेस पार्टी की तरफ से ३ सदस्यों की टीम बनाई गईं जिसमें ख़ुद पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी शामिल थीं और उसके राहुल गाँधी ने भी इसमें दख़ल देते हुए इस मामले को निपटाने के लिए जतन किये I

आख़िरकार आज ऐसा लगा की राजस्थान कांग्रेस में सब ठीक हैं और सचिन पायलट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी से मिलने के लिए उनके आवास पहुँचे, जहाँ उनका स्वागत वर्तमान राजस्थान पीसीसी चीफ़ गोविंद सिंह दोटासरा ने किया और उसके बाद वो सचिन पायलट को लेकर अन्दर चले गए जहाँ पर अशोक गहलोत से उनकी मुलाक़ात हुई और दोनों ने गले मिलकर गिले-शिकवे मिटाने की कोशिश की I 

ये ख़ुशियाँ बहुत देर टिक पाती कि अब राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने कहा है कि बीजेपी और उसके सहयोगी दल आज अशोक गहलोत सरकार के ख़िलाफ़ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लेकर आएंगे I 

इसमें एक घटनाक्रम तब जुड़ गया जब आज पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जी ने राजस्थान के राज्यपाल महोदय से शिष्टाचार भेंट की, वैसे भी राजनीति में शिष्टाचार भेंटों के मतलब अलग होते हैं ,अब ये खेल दिलचस्प होता जा रहा है आप लोग नज़र बनायें रखें I  

अगर अब अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है तो ये देखना दिलचस्प होगा की विधानसभा में क्या होता है लेकिन इसके थोड़ी ही देर बाद कांग्रेस पार्टी की तरफ़ से बयान दिया गया की कांग्रेस पार्टी विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव लेकर आएगी I

खैर अब इस विश्वास और अविश्वास की लड़ाई में जीत किसकी होती है ये देखने वाली बात होगी फ़िलहाल राजस्थान की पॉलिटिकल मिट्टी बहुत ज़्यादा उड़ रही है और अब देखने वाली बात ये है की ये किसकी आँखों में पड़ती है I

बाकी पब्लिक है वो सब जानती हैं I 

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