फ़िल्म रिव्यु: फ़िल्म “सीरियस मैन” का रिव्यु…

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मूवी:- सीरियस मैन

रेटिंग सेक्शन:-
• स्टोरी:- 4/5
• एक्टिंग:- 4.5/5
• डायरेक्शन:- 4/5
• ओवरऑल:- 4.25/5
रिलीज डेट:- 2/10/2020
प्लेटफार्म:- नेटफ्लिक्स
डायरेक्टर:- सुधीर मिश्रा
कहानीकार:- भावेश मंडलिया
कलाकार:- नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, इंदिरा तिवारी, अक्षत दास
नासर, श्वेता बासु प्रसाद
जॉनर:- ह्यूमर, फिक्शन

ये फ़िल्म “मनु जोसेफ” के द्वारा लिखी गयी किताब “सीरियस मैन” से ली गयी है।

कहते हैं कि हर बच्चे के पहले सुपरहीरो उनके माता-पिता होते हैं। कुछ ऐसा ही हमें इस फ़िल्म में देखने को मिलता है। जहाँ एक पिता अपने बेटे के लिए उसका सुपर हीरो है। वो चाहता है कि उसका बेटा जीनियस बने और अपने लिए एक अच्छी ज़िन्दगी चुने।

एक दलित तमिल परिवार से ताल्लुक रखने वाले “अय्यन मानी”(नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) को अपनी ज़िंदगी से बहुत सी शिकायतें हैं। वो अपनी बीवी के साथ मुम्बई में एक चॉल में रहता है।

वो चाहता है कि उसकी जिंदगी में एक बड़ा बदलाव आए। उसे भी उतनी ही इज़्ज़त मिले जितनी बड़े लोगों को दी जाती है। फिर उसके एक बेटा पैदा होता है और यहाँ से असली कहानी की शुरुआत होती है।

अब बात करते हैं फ़िल्म के प्लॉट के बारे में। फ़िल्म में ‘अय्यन मानी'(नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) एक बड़े साइंटिस्ट ” डॉ. अरविंद आचार्य “(नासर) के पी. ए. हैं। अय्यन का एक बेटा है जिसका नाम “आदी” है।

जो अपनी उम्र के बच्चों से कहीं ज्यादा आगे है यानी कि वो “जीनियस” है। दोनों बाप बेटे के बीच एक सीक्रेट है। जब ये सीक्रेट उजागर होता है तो इनकी जिंदगी में एक भूचाल आ जाता है। फ़िल्म इसी के बारे में है।

नवाज़ुद्दीन “अनमचेबल” सिद्दीकी के बारे में तो हम सब जानते ही हैं। वो जिस तरह से अपने आप को रोल में ढाल लेते हैं लगता है कि खुद की कहानी बयाँ कर रहे हों। ऐसा ही कमाल का अभिनय उन्होंने इस फ़िल्म में भी किया है। वो फ़िल्म की जान हैं।

“नासर” जाने माने एक दिग्गज कलाकार हैं जो ‘साइंटिस्ट’ के रोल में पूरी तरह फिट बैठे हैं। “अक्षत दास” ने भी अपना रोल बहुत अच्छे से निभाया है। बाकी कलाकार भी अपने रोल में पूरी तरह फिट नज़र आते हैं।

निर्देशक के तौर पर “सुधीर मिश्रा” ने अच्छा काम किया है। उन्होंने कहानी के लेखक “भावेश मंडलिया” के साथ मिलकर काफी अच्छी फिल्म बनाई है। फ़िल्म में आम आदमी के संघर्ष, उसके सपने, उसके इमोशन्स, और समाज में उसकी प्रतिष्ठा को बड़े अच्छे रूप से परोसा है।

कुल मिलाकर ये फ़िल्म जरूर देखनी चाहिए। बॉलीवुड में आम आदमी पर बनी फिल्मों से थोड़ी अलग और फ्रेश कहानी है।

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