फ़िल्म रिव्यु: डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे…

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मूवी:- डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे

सूफ़ी सोहेल के मीटर पर रेटिंग:-
• स्टोरी:- 3/5
• एक्टिंग:- 3.5/5
• डायरेक्शन:- 3/5
• ओवरआल:- 3/5

रिलीज डेट:- 18/09/2020
प्लेटफार्म:- नेटफ्लिक्स
डायरेक्टर:- अलंकृता श्रीवास्तव
प्रोडक्शन:- बालाजी टेलीफिल्म्स
कलाकार:- कोंकणा सेन, भूमि पेढनेकर (लीड)
अमोल पाराशर, विक्रांत मैसी, कुबरा सैत(सपोर्टिंग)
जॉनर:- कॉमेडी- सटायर

फ़िल्म को सबसे पहले “24 बुसान इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल” में 4 अक्टूबर 2019 को प्रदर्शित किया गया था।

वैसे तो हम अमूमन देखते ही हैं कि दो बहनों या फिर दो भाईयों के बीच लड़ाई झगड़े होते हैं। लेकिन एक उम्र के बाद वो आपस में पक्के दोस्त बन जाते हैं जो एक दूसरे से अपने सीक्रेट शेयर करते हैं। इसी को थीम लेकर इस फ़िल्म को बनाया गया है।

“डॉली”(कोंकणा सेन) दिल्ली में रहने वाली एक मिडिल क्लास नौकरीपेशा महिला है। जिसके दो बेटे हैं और एक बहुत ही मेहनती पति हैं। वहीं दूसरी ओर “किट्टी”(भूमि पेढनेकर) गाँव से नौकरी की तलाश में दिल्ली जैसे बड़े शहर में आई है। छोटे शहर से बड़े शहर में आकर अच्छी नौकरी ढूँढना बहुत मुश्किल होता है। कुछ ऐसा ही “किट्टी” के साथ भी हुआ।

कहानी आगे बढ़ती है “डॉली” अपने परिवार के साथ एक लक्ज़री बिल्डिंग में फ्लैट बुक करा लेती है। उसका अपने आप को मिडिल क्लास से उठकर अप्पर क्लास में दाख़िल होने का सपना है। वहीं “किट्टी” को एक ‘डेटिंग एप्प’ के कॉल सेंटर में नौकरी मिल जाती है। जहाँ उसकी बात “प्रदीप”(विक्रांत मैसी) से होती है और उसे प्यार हो जाता है। उधर “डॉली” को डिलीवरी बॉय “ओस्मान”(अमोल पाराशर) पसंद आ जाता है। दोनों बहनों को एक दूसरे का सीक्रेट पता चल जाता है और कहानी ऐसे ही आगे बढ़ती है।

अब बात करते हैं कलाकरों के अभिनय के बारे में जहाँ “भूमि पेढनेकर” गाँव से आई हुई लड़की के किरदार में एक दम फिट बैठती हैं। “भूमि” ने अपने किरदार को पकड़कर बड़ी ही मासूमियत से निभाया है। वहीं “कोंकणा” काफी वक्त के बाद पर्दे पर लौटी हैं। इस रोल में उनका अभिनय निखर कर आया है।

सपोर्टिंग कास्ट की बात करें तो वेब सीरीज की दुनिया में “अमोल” और “विक्रांत” काफी जाने माने नाम हैं। दोनों ने ही अपने रोल को बड़ी ही सादगी से निभाया है। “कुबरा” के लिया फ़िल्म में बहुत ही छोटा रोल है जो उन्होंने ठीक से कर दिया।

“अलंकृता श्रीवास्तव” ने बतौर डायरेक्टर सही काम किया है। उन्होंने नौकरीपेशा महिलाएँ और छोटे शहर से आई लड़कियों की परेशानी को सही ढंग से प्रस्तुत किया है। फ़िल्म में कुछ कुछ दृश्यों में सटायर और कॉमेडी सही मात्रा में दर्शाया है।

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