मेरा दिल नहीं टूटना चाहिए खटाना भाई

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“मेरा दिल नहीं टूटना चाहिए खटाना भाई”

इस एक लाइन में जितना दर्द भरा हुआ है उतना ही प्यार भी छिपा हुआ है। इस एक लाइन में पूरी फिल्म परिभाषित की जा सकती है। बल्कि मैं कहूँगा की इस लाइन में कई ज़िंदगियाँ परिभाषित की जा सकती है।

मैं यहाँ बात कर रहा हूँ फ़िल्म रॉकस्टार के एक डायलॉग की जो कि फ़िल्म में ‘रणबीर कपूर’ सबसे आख़िर में बोलता है। यह फ़िल्म वर्ष 2011 में रिलीज हुई थी। इस फ़िल्म को डायरेक्ट किया है ‘इम्तियाज़ अली’ ने, संगीत दिया है ‘ए. आर रहमान’ साहब ने और गीतकार ‘इरशाद क़ामिल’ जी हैं।

जहाँ तक मुझे याद है ये फ़िल्म उस वक़्त की सुपरहिट रही थी। आज भी ये फ़िल्म बहुत से लोगों की पसंदीदा है। इस फ़िल्म की कहानी, या अभिनय ही शानदार नहीं था बल्कि इस फ़िल्म के गाने भी रूह को सुकून देने वाले हैं।

जिस खूबसूरती से इस फ़िल्म में ‘इश्क़’ और ‘दर्द’ को दिखाया गया है शायद ही किसी दूसरी फिल्म में दिखाया गया हो। इश्क़ और दर्द ये दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं। जो हमेशा साथ साथ चलते हैं। जहाँ इश्क़ होगा वहाँ दर्द भी अप्रत्यक्ष रूप से मौजूद रहेगा। उसी तरह से जहाँ दर्द होगा वहाँ इश्क़ सही समय के इंतज़ार में होगा।

अब बात करते हैं इसके लीड कैरेक्टर “जनार्दन जाखड़” उर्फ “जॉर्डन” के बारे में। मैं इस फ़िल्म को दो भागों में बाँटना चाहूँगा। पहला वो ‘जनार्दन जाखड़’ जो एक कामयाब सिंगर बनना चाहता है। जो चाहता है कि उसके गाये हुए गाने सबके दिलों पर राज करें। उसके पास संगीत तो है पर उस संगीत को रूह देने के लिए वो दर्द नहीं है।

फिर उसकी मुलाकात होती है “हीर” से और उसका ‘जनार्दन’ से ‘जॉर्डन’ बनने का सफ़र शुरू होता है। इसी फिल्म के एक सुंदर गीत की कुछ लाइनें बताना चाहूँगा जो ‘जनार्दन’ से ‘जॉर्डन’ बनने के सफ़र को दिखाती है।

” फ़िर से उड़ चला मैं
मिट्टी जैसे सपने ये
कितना भी पलकों से झाड़ो
फ़िर आ जाते हैं।
इतने सारे सपने क्या कहूँ
किस तरह से तोड़ें हैं छोड़े हैं क्यूँ”

दूसरे भाग में देखने मिलती है ‘जॉर्डन’ की कहानी जो काफी पॉपुलर है, काफी कामयाब है। उसके सारे एल्बम हिट हैं। इन सबके होते हुए भी उसके पास नहीं है वो ‘सुकून’। इस सफ़र के दौरान ‘हीर’ की शादी किसी दूसरे से हो जाती है। तब जॉर्डन रह जाता है लेकर अपना ‘इश्क़’ और ‘मुट्ठी भर दर्द’।

जिस तरह जॉर्डन और हीर एक दूसरे से मिलते हैं, फिर बिछड़ते हैं और फिर जा मिलते हैं। तब हीर कहती है मैं तुम्हारा उस पार इंतज़ार करूँगी। मेरी नज़र में इंतज़ार से खूबसूरत कोई दूसरी चीज नहीं। क्योंकि इंतज़ार ही तो है जो हमारे अंदर रोमांच बनाये रखता है। हमें जिंदा महसूस करवाता है।

आजकल के इश्क़ में यही तो दिक्कत है हम इश्क़ तो करना चाहते हैं पर इंतज़ार नहीं। हमें लगता है कि इश्क़ कोई इंटरनेट कनेक्शन है जो 4 जी की स्पीड से गले आ लगेगा।

हम चाहते हैं इज़हार करना अपने इश्क़ का,अपनी हीर को बताना चाहते हैं। हम डरते हैं कि कहीं उसने हमें इंतज़ार करने को कहा तो आखिर कब तक और कितना इंतज़ार हमें करना होगा। इन सब कशमकश में हम भूल जाते हैं इश्क़ करना और सिर्फ दिखावा करने लगते हैं, डरने लगते हैं।

अगर हमें ‘हीर’ को पाना है तो ‘जॉर्डन’ तो बनना ही पड़ेगा,आख़िर में हीर और जॉर्डन की कहानी के नाम ‘तहज़ीब हाफ़ी’ का ये शेर पढ़ना चाहूँगा।

“उसने शादी भी की है किसी से
और गाँव में क्या चल रहा है।।

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