‘पता नहीं ज़िन्दगी का आखिरी दिन कब हो’,कुछ ऐसा ही कहती है ऋतिक की ‘गुज़ारिश’

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कोई ये भूलके भी ना सोचे कि हम में अब ज़िन्दगी नहीं बची। जितनी भी है, जैसी भी है, ज़िन्दगी बहुत खूबसूरत है।”

हम लोग अक्सर अपनी ज़िंदगी में पेश आने वाली छोटी छोटी मुश्किलों से तंग आ जाते हैं। जब हम तंग आ जाते हैं तब हम ज़िन्दगी को कोसने लगते हैं। हम अपने अंदर ढेरों कमियाँ तलाशने लगते हैं। खुद को दूसरों से तोलने लग जाते हैं। इस तरह हम खुद की ज़िंदगी को बदहाल बना लेते हैं। हमें नहीं पता कब ज़िन्दगी का आखिरी दिन हो। इसलिए हमें ज़िन्दगी को जीना चाहिए, उसे हर रोज़ सेलिब्रेट करने चाहिए।

बात हो रही है “गुज़ारिश” फ़िल्म के बारे में जो साल 2010 में आई थी। फ़िल्म को “संजय लीला भंसाली” ने लिखा भी, म्यूजिक भी कंपोज़ किया और उसका डायरेक्शन भी खुद ही किया। फ़िल्म में ह्रितिक रोशन, ऐश्वर्या राय बच्चन और आदित्य रॉय कपूर मुख्य भूमिका में थे।

फ़िल्म की कहानी गोवा से शुरू होती है। जहाँ एक बहुत ही मशहूर जादूगर “ईथन मस्कारेन्हास”(ह्री. रो.) है। जो एक बिस्तर पर लेटा हुआ है। उसकी देखभाल उसकी नर्स “सोफिया”(ऐ. रा.) करती है। ईथन का चौदह साल पहले एक एक्सीडेंट हो गया था। जिसकी वजह से उसका पूरा शरीर पैरालाइज हो गया है। उसका शरीर हिलता-डुलता नहीं है और धीरे धीरे उसके शरीर के अंग एक के बाद एक बन्द होते जा रहे हैं। लेकिन वो फिर भी अपनी ज़िंदगी से खुश है।

Life is beautiful

हम सब यही सुनते और मानते आए हैं कि ज़िन्दगी बहुत खूबसूरत है। हमें बचपन से ही इस तरह के भरम में फंसा दिया जाता है। लेकिन जब हम बड़े होते हैं और ज़िन्दगी में हर रोज़ नई परेशानी का सामना करते हैं। तब हम ही ज़िन्दगी को कोसने लग जाते हैं। हमें सिखाना चाहिए था कि ज़िन्दगी खूबसूरत तो है पर उसकी अपनी चुनौतियाँ हैं जिसके लिए हमें हमेशा तैय्यार रहना होगा।

“ईथन” अपने घर से गोवा में एक रेडियो प्रोग्राम चलाता है। जिसका नाम ‘रेडियो ज़िन्दगी’ है। वो रेडियो के ज़रिए लोगों को ज़िन्दगी जीने और मुश्किलों में हिम्मत से काम लेने का हौसला देता है।

लाइफ बहोत छोटी है दोस्तों पर दिल से जियो तो बहुत है।

ज़िन्दगी को हर रोज़ मुस्कुराते हुए जीना चाहिए। इससे ज़िन्दगी हमें बड़ी लगने लगती है। अगर हम हर रोज़ ज़िन्दगी को कोसते रहेंगे तो वो एक दिन ऐसे ही हमें बिना खबर किये खर्च हो जाएगी। हम इस तरह ठीक से जी भी नहीं पाएंगे। इसलिए हमें जितनी भी ज़िन्दगी मिली है उसे जिंदादिली से जीना चाहिए।

“ईथन” खुशदिल इंसान होने के बावजूद एक दिन अपनी छोटी सी “गुज़ारिश” अपनी दोस्त के सामने रख देता है। वो चाहता है कि उसे इच्छा मृत्यु दे दी जाए। क्योंकि उसका मानना है कि जब हमें ज़िन्दगी जीने का अधिकार है तो खुद के अनुसार मरने का भी होना चाहिए। क्योंकि उससे आप ये दर्द और बर्दाश्त नहीं हो रहा है। उसकी दोस्त कोर्ट में इच्छा मृत्यु की याचिका लगा देती है।

Pain is very personal thing

किसी ने सही ही कहा है दर्द हमेशा हमारा अपना होता है। प्यार, मोहब्बत, खुशी हर चीज़ हम दूसरे से बाँट सकते हैं। दूसरे के साथ जी सकते हैं लेकिन हम अपने दर्द को दूसरे को बता तो सकते हैं। पर उसे बाँट नहीं सकते मतलब उसे दूसरे के साथ जी नहीं सकते। हमें उसे खुद ही जीना होता है।

कोर्ट “ईथन” की इच्छा मृत्यु की याचिका को रद्द कर देता है। पिछले बारह सालों से “ईथन” की देखभाल करते हुए “सोफिया” उससे प्यार करने लग जाती है। आखिर में “ईथन” भी उससे शादी कर लेता है। फिर एक गाना बजने लगता है जिसके बोल कुछ यूँ हैं।

“बस इतनी सी तुमसे गुज़ारिश है
ये जो बारिश है, देखो ना
इस में तेरी बाहों में मर जाऊँ
बस इतनी सी, छोटी सी, ख़्वाहिश है”

“ईथन” के नाम आखिर में “जॉन एलिया” साहब का ये शेर पढ़ना चाहूँगा।

“जो गुज़ारी न जा सकी हमसे
हम ने वो ज़िन्दगी गुज़ारी है”

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