नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई विक्रांत मैसी और श्वेता त्रिपाठी की फ़िल्म ‘कार्गो’,जानिये क्या है खास

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मूवी:- कार्गो

रेटिंग सेक्शन:-
• स्टोरी:- 3.75/5
• एक्टिंग:- 4/5
• डायरेक्शन:- 3.75/5
• ओवरऑल:- 3.75/5

रिलीज डेट:- 9/9/2020
प्लेटफार्म:- नेटफ्लिक्स
डायरेक्टर:- आरती कड़ाव
कलाकार:- विक्रांत मैसी, श्वेता त्रिपाठी,नंदू माधव
जॉनर:- साइंस फिक्शन

फ़िल्म को सबसे पहले 9 अक्टूबर 2019 को MAMI फ़िल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया गया। वहाँ इस फ़िल्म को काफी अच्छी सराहना मिली।

हमारी पौराणिक कथाओं के अनुसार हम लोग मृत्यु के बाद के जीवन में भी विश्वास रखते हैं। जैसा कि हमें बताया गया है कि हमारी मृत्यु होने पर ‘यमराज’ अपने वाहन पर सवार होकर हमें लेने पहुंच जाते हैं। हमें दूसरे लोक ले जाया जाता है। जहाँ हमारे पाप और पुण्यों का लेखा जोखा होता है।

ऐसा ही इस फ़िल्म में देखने को मिलता है। जहाँ एक “पोस्ट डेथ ट्रांजीशन सर्विसेज” नाम की कंपनी है जो लोगों के मरने के बाद उन्हें बदलकर नए जन्म के लिए तैय्यार करती है। इसमें एक राक्षस “प्रहस्था”(विक्रांत मैसी) जो कि “पुष्पक 934 A” स्पेस शिप पर मौजूद है। जिसका काम है “धरती लोक” से आये मरे हुए लोगों को सही करके अगले जन्म में प्रवेश दिलाना। जहाँ उनकी सहायक “युविष्ठा”(श्वेता त्रिपाठी) लोगों को हील करने में उनकी मदद करती है।

अब बात करते हैं फ़िल्म के प्लॉट के बारे में। फ़िल्म देखा जाए तो “हॉलीवुड” में बनने वाली साइंस फिक्शन फिल्मों की तरह ही नज़र आती है। लेकिन फ़िल्म की कहानी को पूरी तरह से भारतीय टच दिया गया है। जिसमें पौराणिक कथाओं और 1980 कि टेक्नोलॉजी को दर्शाया गया है। एक डार्क कॉमेडी और साइंस फिक्शन होने के हिसाब से फ़िल्म सही है।

“विक्रांत मैसी” और “श्वेता त्रिपाठी” वैसे तो दर्जनों फिल्मों और वेब सीरीज में नज़र आ चुके हैं। जिनके अभिनय के बारे में तो आप सब अच्छे से परिचित ही होंगे। “विक्रांत मैसी” ने अपने राक्षस वाले अवतार को जो कि बिल्कुल इंसानों की तरह ही सब काम करता है बड़ी ही बख़ूबी से निभाया है। वहीं दूसरी और “श्वेता त्रिपाठी” ने अपने रोल को खूबसूरती और मासूमियत के साथ अदा किया जिसके लिए वो जानी जाती है।

निर्देशक के तौर पर “आरती कड़ाव” ने अच्छा काम किया है। उन्होंने स्टोरीलाइन पकड़कर बड़ी सधी हुई फ़िल्म तैय्यार की है। जिसमें जगह जगह पर इमोशन्स और सिचुएशनल कॉमेडी का मिश्रण है। फ़िल्म में सिनेमेटोग्राफी और विसुअल ग्राफ़िक्स काफी अच्छे से दिखाए हैं। फ़िल्म को एक बार जरूर देखना चाहिए।

कुल मिलाकर ये अभी तक कि साइंस फिक्शन पर बनी बॉलीवुड की फिल्मों से थोड़ी अलग और फ्रेश कहानी है। हमें एक दर्शक के तौर पर ऐसी ही अलग और फ्रेश फिल्मों की हमें तलाश होती है।

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