डिअर कॉमरेड हमारे रास्ते अलग हैं, मेरे यहाँ से जाते ही तुम मुझे भूल जाओगे

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हमारे रास्ते अलग हैं, मेरे यहाँ से जाते ही तुम मुझे भूल जाओगे

ये लाइन हर उस शख़्स ने जरूर सुनी होगी जिसने अपनी ज़िंदगी में किसी से मुहब्बत की है। रास्ते हमेशा अलग ही होते हैं, बस उन रास्तों पर चकते हुए जो लोग एक मंज़िल तक पहुँच गए बस उन्हें ही मुहब्बत नसीब हुई है।

यह डॉयलोग है वर्ष 2019 में रिलीज़ हुई तेलुगु सिनेमा की फ़िल्मडिअर कॉमरेडसे है। जिसका लेखन और निर्देशन का कार्यभरत कैमाने किया है। ये उस साल की सुपरहिट फिल्म रही है जिसमें मुख्य भूमिकाविजय देवरकोंडाऔररश्मिका मंधनाने निभाई है। इस फ़िल्म नेविजयको फैन फॉलोइंग के साथ साथरौडीका टैग दिलवाया।

इस फ़िल्म मेंविजयनेबॉबीका किरदार निभाया बै जो कि एक स्टूडेंट यूनियन के लीडर हैं। वहींरश्मिका मंधनानज़र आती हैंलिलीके किरदार में जो एक स्टेट लेवल क्रिकेटर हैं। फ़िल्म का नाम देखकर लगता है कि ये किसी पोलिटिकल मुद्दे पर बनी फिल्म है।

जबकि इस फ़िल्म में हर वो फ्लेवर देखने को मिलता है जिसकी उम्मीद एक दर्शक फ़िल्म से लगाता है। जैसे कि इसमें एक इंटेंस लव स्टोरी है, पोलिटिकल मुद्दा है, क्रिकेट के फील्ड की स्टोरी के साथ ही नेचर पर भी ये फ़िल्म कुछ हद तक फोकस करती है। मानो एक ही थाली में बड़े ही करीने से सारे व्यंजन परोस दिए गए हों।


बात करते हैं फ़िल्म के बारे में जहाँबॉबीअपने दादा जी से काफी प्रेरित है। क्योंकि उसके दादा जी एक स्वतंत्रता सेनानी थे जिसकी वजह से लोग उन्हेंकॉमरेडबुलाते हैं।

जो उसे बताते हैं किकॉमरेडका मतलब होता है:-
दूसरों को साथ लेकर चलने वाला, जो हर मुश्किल में उनका साथ ना छोड़े
कॉमरेड जरूरी नहीं कि हमेशा एक लीडर ही हो, वो आपका कोई दोस्त हो सकता है या फिर आपका पार्टनर भी हो सकता है।

बचपन से आज तक अपने बड़ों से सुनते आए हैं किहमें हमारे गुस्से पर काबू रखना चाहिए। गुस्सा हमारा सबसे बड़ा दुश्मन होता है जो हमारे साथ सब कुछ तबाह कर देता है कुछ ऐसा ही इस फ़िल्म मेंबॉबीके साथ भी देखने को मिलता है। उसे “Anger Management issue” है। सीधी भाषा में कहें तो वो अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाता है।

कहते हैं किप्यार वो दवा है जिससे अच्छे अच्छे काबू में हो जाते हैं जब बॉबी को लिली से प्यार हो जाता है, तब वो उससे इज़हार करने के लिए बारिश में भीगता हुआ पूरी रात स्कूटर चलाकर लिली के शहर पहुँच जाता है। दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं। तभी अचानक एक दिनबॉबीफिर किसी झगड़े में उलझ जाता है औरलिलीउसे हमेशा के लिए छोड़ कर चली जाती है।

वक़्त और नेचर हर ज़ख्म की दवा होते हैं
कुछ ऐसा हीबॉबीको अगले पाँच सालों में महसूस होता है। वोसाउंड थेरेपीकी मदद से अपने आपको संभाल लेता है।
इसीसाउंड थेरेपीके सिलसिले में उसका शहर आना होता है तब वहाँ उसे हॉस्पिटल के बेड परलिलीनज़र आती है। मालूम करने पर उसे पता चलता है कि इसकी वजह उसके क्रिकेट बोर्ड का डायरेक्टर है।

फिर से उसे कुछ महसूस होता है और वो अपनेकॉमरेडवाले रूप में जाता है। वोलिलीके लिए लड़ता है, लड़ता ही नहीं बल्कि उसे लड़ना सीखाता है जो खुद पूरी तरह से हार मान चुकी थी।

हम सबको भी अपने अंदर केकॉमरेडको जगाकर रखना होगा। ताकि वक़्त आने पर हम अपने साथ साथ उस शख़्स के लिए भी लड़ सकें जिससे हम मुहब्बत करते हैं।
अपनी बातवसीम बरेलवीजी के इस शेर के साथ खत्म करना चाहूँगा।

उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना जरूरी है,
जो ज़िन्दा हो तो फिर ज़िन्दा नज़र आना जरूरी है


सूफ़ी सोहेल

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