चुस्कियाँ

चुस्कियाँ
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“ये एक काल्पनिक कहानी है जिसे लिखा है सूफ़ी सोहेल ने” I

अगर चाय इतनी गरम है तो ठंडी होने पर पी लेना ना
मैंने थोड़ा सा नाराज़ होते हुए कहा।

चाय का मज़ा चुस्कियाँ लेकर पीने में है। जब अदरक की खुशबू आती है ना चाय में घुलने पर तब लगता है जैसे चाय एक सरगम है और अदरक उसमें छेड़ी गयी तान। खैर, ये तुम कोल्ड कॉफ़ी पीने वाले क्या जानो
उसने हल्की सी हँसी के साथ मुझे चिढ़ाते हुए बोला।

हमारी बात तो कॉफ़ी डेट की हुई थी ना कि चाय डेट की हुई थी
मैंने सफाई पेश करने की कोशिश की।

तो तुम्हें कॉफ़ी पसन्द है इसलिए तुम कॉफ़ी पी रहे हो और मुझे चाय से मुहब्बत है। वैसे भी 4 महीने लगा दिए डेट के लिए पूछने में तुमने।
इस दफ़ा वो थोड़ा चिढ़ गयी थी।

वो कितनी आसानी से अपनी नाराजगी भी ज़ाहिर कर देती थी और बातों में ये भी बता देती थी कि उसे क्या पसंद हैऔर क्या नहीं।
सिद्धिकासे मिले हुए या यूँ कहूँ की बात करते हुए मुझे 4 महीने बीत चुके थे। इन 4 महीनों में हमने एक दूसरे को अपने सारे राज़ और सारे डर बता दिए थे।

जैसे उसे चाय पीते हुए गाने सुनना पसंद था, उसे हर पिक्चर अपने लैपटॉप पर देखना पसंद है , उसने बताया था एक बार की उसे जामुन बड़े पसन्द है और पतंग उड़ाना भी। उसे कार्टून देखना बहोत पसंद है और बिल्लियों से भी खासा लगाव है।

उसे सोते हुए लगता है कि कोई है जो उसके पैरों के पास बैठा हुआ है इसलिए वो हमेशा अपने पैरों को फोल्ड करके सोती है।
उसने ये भी बताया था कि तेज़ हवाओं से उसे काफी डर रहता है क्योंकि उसे लगता है कि जब भी तेज हवा चलती है तब उसकी लाइफ में कुछ बुरा होता है।

सॉरी, ये तो बताओ आज ये कोनसा गाना चलाया हुआ है पीछे?
मैंने बात पलटने की कोशिश की।

ये मोहम्मद रफ़ी साहब का गाना है, तुम्हें नहीं पसन्द आएगा। तुम्हें तो बस वो गानों के नाम पर शोर पसन्द है , जिसमें ना कोई रूह होती है ना ही सुकून होता है।
सिद्धिका अभी भी मुझसे नाराज थी।

अब इसमें मैं क्या करूँ मेरी चॉइस तुमसे अलग है तो, वैसे भी तुम्हें फिजिक्स का सिम्पल रूल तो पता ही होगा ।
मैंने ये कहा और हँसने लगा।

हाँ, तुम और तुम्हारे ये इंजीनियरों वाले जवाब, अपने लिए फिर कोई ‘IT Girl’ ही ढूँढते ना, मुझसे क्योँ मुहब्बत में उलझ गए।
उसने अपनी चाय से आखरी चुस्की ली और कप टेबल पे रख दिया।

काश, उस दिन इंस्टाग्राम पर तुम्हारी वो पेंटिंग ना पसंद आई होती तो आज कहानी कुछ अलग होती और वैसे भी मुझे आर्टिस्ट लोगों से मुहब्बत जल्दी हो जाती है
मैं उसे मनाने की पूरी कोशिश में लगा हुआ था।

तुम्हें अगर फ़्लर्ट करना ही है तो थोड़ा तो अच्छे से फ़्लर्ट करो वेद।
उसने हँसते हुए कहा।

वेदयानी कि मैं, वही यजुर्वेद, ऋग्वेद, सामवेदइन्हीं वेदों की वजह से मेरा नाम रखा गया क्योंकि मेरे घरवालों का मानना था कि मुझमें संस्कार, सहिष्णुता, स्वावलंबन, अनुशासन के गुण आएंगे। जो कि मुझमें दूर दूर तक नहीं थे।

हाँ, मैं एक इंजीनियर हूँ और दिल्ली में एक अच्छी कंपनी में अच्छी पोस्ट पर हूँ। मुझे दिल्ली की सर्दियाँ काफी पसंद है और दिल्ली से फिर पहाड़ी शहर भी थोड़े पास पड़ते हैं। मुझे घूमना काफी पसंद है इसलिए मैं साल में कम से कम 2 बार बाहर घूमने जरूर जाता हूँ।

मुझसे मिलने मुम्बई कब आ रहे हो, तुमहें मुझसे वादा किये हुए पूरे 2 महीने गुज़र चुके हैं
उसने अपनी ज़ुल्फ़ों में हाथ घुमाते हुए बगैर मेरी तरफ देखे पूछा।

तुम ये कर कैसे लेती हो, मतलब जैसे मैं तुम्हारे सामने हूँ भी और नहीं भी
अच्छा तुम्हारा एग्जीबिशन कब है?”
मैंने तुरंत बात पलट दी।

अगले हफ़्ते पर तुम्हें उससे क्या, तुम बैठे रहना अपने आफिस की बोरिंग सी मीटिंग में
उसने फिर से मुझे बिना देखे ही कहा।

तुम तो जानती हो मुझे कितना काम होता है, मैं ऐसे ही कहीं भी बाहर नहीं जा सकता हूँ ,सिद्धिका मैं कोशिश करूँगा।
मैंने वही घिसा पीटा जवाब दिया।

चलो, आज का टाइम पूरा हो गया बाकी बातें कल होंगी।
उसने ये कहा और वीडियो कॉल डिसकनेक्ट कर दिया।

दरअसल पिछले चार महीने से हमारी बातें वीडियो कॉल पर ही चल रही थी। वो आज के ज़माने वाला डिजिटल इश्क़‘,जी वही इश्क़ हमारा भी चल रहा था। जिसमें एक दूसरे से मिलने के भरपूर वादे थे, रोज़ नई कहानियाँ थी और मुहब्बत वो हर रोज़ बढ़ती ही जा रही थी।

मुझे बस इस बात का इंतज़ार था कि जब मैं सिद्धिकासे पहली बार मिलूँगा तो उससे बात क्या करूँगा। अच्छा वो जगह कोनसी होगी जहाँ हम मिलेंगे या वो मैं कोनसे रंग की शर्ट पहनके जाऊँगा। ऐसे ढेरों सवालों का एक पूरा फॉरमेट मेरे दिमाग के डेटा बेस में जमा था, एक सिक्योर फोल्डर के अंदर।

एक हफ्ते बाद।

पेंटिंग तो बिक गयी अब ट्रीट के लिए कहीं लेकर चलोगी या यहीं से मुझे दिल्ली लौटना होगा
मैंने धीरे से उसके कान में कहा।

आज हम आपको मुम्बई की सबसे खूबसूरत शाम का दीदार करवाएँगे
उसने मेरी तरफ मुड़कर कहा और मुझे गले लगा लिया।

हम दोनों उसकी कार में थे और मैं सोच रहा था कि इश्क़ जताने के लिए किसी तरह की प्लानिंग की जरूरत नहीं है। बस आपके साथ आपके महबूब का होना ही काफी है।

कुछ देर बाद हम दोनों मरीन ड्राइव पर थे जहाँ मैं उसके हाथ की बनाई हुई चाय की चुस्कियाँले रहा था और मानो सूरज बड़े इत्मीनान से ठहरकर मुझसे पूछ रहा हो:-

कैसी लगी इश्क़ की ये चुस्कियाँ‘?

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