आदिवासी संस्कृति और विरासत

आदिवासी संस्कृति और विरासत

श्वेता झा: दिल्ली आदिवासी संस्कृति जान ने से पहले,ये जानना जरूरी है कि संस्कृति कि परिभाषा क्या है| वही संस्कृति जिसे आप हम सदियों से परम्परा जान कर निभाते आ रहे है,संस्कृति का सीधा सा अर्थ है,परिष्कार और संस्कार जिसमें भौतिक साधनों के साथ आध्यात्मिक गरिमा सम्मलित रहता है ! वेशभूषा,परम्परा,पूजाविधान,समाजिक रीतियाँ,रिवाज,समाजिक नीतियां ये सभी संस्कृति के अंतर्गत आता है I भारतीय संस्कृति और सभ्यताओं में सभी ओर आदिवासी संस्कृति और परम्पराओं की छाप हैं बावजूद इसके ये तथ्य आम लोगों की जानकारी में बहुत कम है! भारतीय रीतीरिवाज़,भाषा और दर्शन शास्त्र में भी मूल निवासियों का जितना  फैलाव और प्रस्ताव है उस तरीके से उन्हें उतनी महत्त्वा ना देकर सभी बातों को नजरअंदाज कर दिया है ! इतिहास कारों से लेकर समाज शास्त्रियों तक ने,उन्हें कम करके आँका या भुला दिया गया है!  हर समाज की संस्कृति उसका सांचा है और सामान्य संस्कृति के लक्षणों के निरधारण में किसी भी एक संस्कृति का सांचा सम्पूर्ण नहीं हो पाता !  किसी भी सभ्य समाज का अतीत बहुत महत्वपूर्ण होता है! ऐसे में मूलनिवासी केसंदर्भ में विचार करेंतो यह सवाल और नुकीला हो जाता हैं कि क्या उन्हें मानव सभ्यता के पुरातात्विक के रूप में पुरातन जीवन स्थिति में ही अलग थलग रहने दिया जाए या विज्ञान और तकनीकी प्रगति की आधुनिक व्यवस्था में समायोजितहोने का अवसर भी दिया जाए..  झारखंड सांस्कृतिक दृष्टि से एक समृद्ध अतीत और वर्तमान का क्षेत्र है! ये क्षेत्र और यहाँ के मूलनिवासी जातियां,जहाँ जनजातियाँ और  सदानी समुदाय कि साझेदारी हैं! ये सदियों से एक समरस और समतावादी समाज बनाकर रहते आए हैं !  यहाँ का इतिहास लगभग दो हजार साल पुराना है जब सदानी जातियों कि मूल जाती नाग वंशियों ने छोटा नागपूर में अपना एक राज्य बनाया था!  नाग जाति के बारे में अभी तक पर्याप्त शोध नहीं हुए है लेकिन इस सन्दर्भ में कई विद्वानों ने हमेशा खोज करते हुए कुछ प्रमाण और साक्ष्य जुटाएं हैं जिससे नाग जाति के  इतिहास के अस्तित्व को माना गया है !   नाग जाति बहुत ही सुसंस्कृत,बहादुर और शान्ति प्रिय जाति रही है इस जाति ने गौतम बुद्ध के नेतृत्त्व में सैंकड़ों वर्षोँ तक ब्राह्मण धर्म के जाति-भेद और छुआ-छुत के ख़िलाफ़ संघर्ष किया था! आज हिन्दू धर्म के कई पर्व और त्यौहार इस जाति के संस्कृति से लिए गए है प्रसिद्ध राजा शशांक इसी नाग जाति के थे !  सदानी जातियों के साथ ही इस क्षेत्र की बाकि जनजातिय समाज और उनकी संस्कृति भी बहुतपुरानी है!   मुंडा जनजाति के भूमिज लोगों ने सिंहभूम-वराह भूम के इलाके में अपना भूमिज राज कायम किया था !छोटा नागपुर( पश्चिम बंगाल,बिहार,उड़ीसा,छतीसगढ़ और झारखंड) में पाए जाने वाले अनेकों स्थलों पर जिसे असुर स्थल कहा गया वहां से प्राप्त पुरातात्विक वस्तुओं के आधार पर यह कहा जाता है कि संस्कृति दृष्टी से छोटा नागपुर उतनाही प्राचीन है,जितनी कि  सिन्धु घाटी की सभ्यता!    फिर भी साधारणत: बिहार का और छोटा नागपुर का शुरुवाती सांस्कृतिक इतिहास रहस्य के आवरण में ढंका हुआ है ! इसलिए इस  क्षेत्र का इतिहास ज्यादातर वैदिक,पौराणिक,जैन तथा बौद्धध साहित्य के कुछ अवलोकन,पुरातात्विक वस्तुओं के अध्यन और क्षेत्रीय लोक साहित्य और दंत कथाओं के विश्लेष्ण के आधार पर ही तैयार किये जा सकते है !  ऐसा अनुमान लगाया गया है कि मुंडा लोग इस क्षेत्र में ईसाई युग शुरू होने से पहले ही आकर बसने लगे होंगे !   असुर संस्कृति के बारे यह कहा जाता रहा है कि ये संस्कृति कुषाण काल से है और ऐसा दो असुर स्थलों पर पाए जाने वाले कुषाण सिक्कों से पता चलता है! ऐसा माना जाता है कि असुर लोग भगवान शिव के बड़े भक्त थे और वो शिव लिंग की पूजा करते थे !   समय बीतने के साथ साथ जनजाति समुदायों के भीतर स्वेच्छिक भेदभाव शुरू हो गये,जिसके कारण उनको एकीकृत हिन्दू समाज में बिना किसी हिंसा या बल के प्रयोग के जातियों में बाँट दिया! मध्य भारत में,जनजाति समुदायों में से कई शासक राजकुल भी हुए !  देश में धीरे धीरे अंतिम परिणाम यह हुआ कि जन जाति समुदाय के देवी देवता और रीतीरिवाज,धार्मिक क्रियाए,संस्कार और अनुष्ठान “हिन्दू” समाज की वृहत धारा में प्रवेश हो गये ! आदिवासी परम्पराओं में पुरखों की पूजा,प्रजनन शक्ति के देवी देवता,यहाँ तक कि नर-नारी प्रजनन अंग प्रतिको (शिव-शक्ति) की आराधना,गृह देवता की पूजा इन सभी ने अपना प्रभाव जमाया ! जिस प्रथा को आज हिन्दूवाद या हिन्दू धर्म कहते हैं उसमें उन सब ने अपना रास्ता बना लिया! “उपवास” रखना जैसी धार्मिक क्रिया भारतीय समाज में बड़े पैमाने पर फैली हुई है ये प्रथा भी आदिवासी मूल से ही ली गयी है जो मनोकामना प्राप्ति या नैतिक शुचिता के लिए रखा जाता रहा है !    महादेवी श्वेता देवी ने बतलाया है कि शिव और काली जनजाति के मूल से हैं जैसेकि कृष्ण और गणेश भी,8 वीं शताब्दी में मूलनिवासीयों की वनदेवी को शिव किपत्नी के तौर पर माना गया था ! हाथियों को प्रशिक्षित करने वालों की जनजाति से ही गणेश का उद्दम हुआ जिनका हिन्दू समाज में हाथी-चिन्ह,देव के रूप प्रवेश हुआ था !    भारत के इतिहास में सन 647 से 1200 ई. तक के काल को राजपूत काल भी कहा जाता है! छोटा नागपुर राज पहली सदी में स्थापित हुआ माना गया है! गुप्त साम्रज्य के पतन के बाद सन 83 ई. में उन्नीश वर्ष की आयु में फणी मुकुट राय को छोटा नागपुर के शासन के लिए इन्हें प्रथम राजा बनाया गया ! भारत के पश्चिम भाग में उस समय कनिष्क का शासन था !  इसी तरह दो प्राचीन भाषाएँ संस्कृत और पाली के साथ आदिवासी भाषाओं के घुलने के परिणाम स्वरुप भारत की दूसरी क्षेत्रीय भाषाएं उत्त्पन्न हुई हैं जैसे उड़िया,मराठी,बंगाली और भारत की तमाम भाषाओँ में आदिवासी के शब्दोँ को स्वीकार किया है!   आदिवासी समाज हमेशा से अपने जख्मों का इलाज़ से स्वयम किया,विभिन्न पौधों और औषधि उपयोगों का ज्ञान होने के कारण उन्होंने हमेशा आयुर्वेद दवाईयों की उत्पत्ति में बहुमूल्य योगदान दिया है ! जैसे दांतों की सुरक्षा के लिए दातुन,जड़ें एवं मसालें,हल्दी का रसोई में उपयोग और मलहमों की खोजें आदिवासीयों की हैं!   आदिवासी वाद्ययन्त्र जैसे बांसुरी और ढोल,जन कथाएँ,नृत्य और ऋतुओ का समारोह ये सभी भारतीय रिवाजों में आदिवासी संस्कृति से ही आया,यहाँ तक की धातु विज्ञान की कुशलताओ एंव ललित कलाओं की जगह बनाई है !   आदिवासी समाज ने कृषि उन्नति के भी बहुत महत्वपूर्ण काम किये है,जैसे अदल बदल करके फसलें उगाना,जमीन के उर्वरकता बनाये रखने के लिए वैकल्पिक फसलें और जमीन को प्रति या चारा गाही उपयोग के लिए छोड़ देना! उड़ीसा के आदिवासी चावल के अलग किस्में पैदा करने में सहायक रहे है !  भारत के मध्य भाग में आदिवासी समुदाय महत्वपूर्ण ऊँचाईयों तक उठे और खुद के शासक कुलों को पैदा किया! शुरूआती राज्य जो गोंड़ राज्य के नाम से था वो 10 वीं शताब्दी में शुरू होते हुए 18 वीं शताब्दी तक अपने स्वतंत्र अस्तित्व बनाये रखने में सफल हुई थी! हालांकि उस वक्त मुगल साम्राज्य ने उन्हें अपनी निष्ठा के लिए मजबूर किया जाता रहा था ! गढ़ मंडला राज्य ने उत्तर में उपरी नर्मदा घाटी के अधिकांश इलाके और आसपास के जंगली भूभागों पर नियंत्रण फैला लिया था!   गढ़ मंडला राज्य के बड़े केंद्र में से एक केंद्र जबलपुर था,वहां एक बड़ी राजधानियों कि तरह किला और राज महल था ! गोंड़ शासन के दौरान बहुत ही बारीक नक्काशी था मिथुन के मूर्तियों के मन्दिर के साथ कई महलों का भी निर्माण हुआ था! उस दौरान चन्देल राजाओं के साथ गोंड़ शासक के और उनके कुलों के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध रहा,दोनो अपने चतुराई के माध्यम से मुगल राज्य से अपनी स्वतंत्रता बचाए रखने में प्रयासरत रहा करते थे !   छोटा नागपुर या झारखंड के सांस्कृतिक परिवर्तनों के पिछले पांच सौ वर्ष का उल्ट फेर काल रहा होगा और झारखंड संस्कृति की बुनियादी पहचान को कई तरह से तोड़ा और मोड़ा गया है ! इसी दौर में पुराने समाज-संगठन धीरे धीरे कमाबोश ढीले पड़ते गये और मुस्लिम,ईसाई जीवन का प्रवेश होता चला गया! इसलिए ये कहना इतिहास सम्मत होगा कि अपने शुरूआती उदभाव काल में इस क्षेत्रीय संस्कृति में हिन्दू समाज-संस्कृति कि कई विकृतियाँ और संस्कार जुड़े,लेकिन इससे ज्यादा बड़े पैमाने पर संस्कृति पर आक्रमण मुस्लिम और अंग्रेज़ शासन काल में हुए!  भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान ही सबसे पहले जनजातियों के संस्कृतिक जीवन में हस्तक्षेप की प्रक्रिया शुरू हो गयी,जहाँ जनजातियों की निर्धनता का लाभ उठाकर ईसाई मिशनरी ने उनके बीच अनाज,कपड़े और दवाईयाँ बांटनी शुरू की,जिसके परिणाम स्वरूप जनजातियों का उनकी ओर खींचना स्वाभाविक था,लिहाजा बड़े पैमानों पर धर्म परिवर्तन हुआ ! लेकिन उनके जीवन पर कोई ख़ास सुधार नहीं हुआ ! स्वतंत्रता के बाद आदिवासी सबसे कम लाभांवित हो पायें!  अपनी परम्परागत जमीन से आदिवासियों को बड़ी संख्या में हटा दिया गया,उनके पारम्पारिक स्त्रोतों को जंगल माफियायों ने हड़प लिए और उनकी संस्कृति को निरंतर नष्ट किया जाता रहा है !  लेकिन यह बहुत जरूरी है आदिवासी समुदायों कि शानदार धरोहरों का संरक्षण एंव लेखन के अवसर,प्रदुषण रहित उपयोग,वन व्यवस्थायेन,शिक्षण संस्थाओं में निवेश और संरक्षण योजनायें  को समझने और इसके संबंध में केन्द्रीय सरकार को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है !  शैक्षणिक,सांस्कृतिक और आर्थिक अवसरों में आदिवासियों को विशेष प्राथमिकता मिलना चाहिए,जिससे उनके द्वारा सहे गये अन्यायों को प्रभावी रूप से प्रतिकार किया जा सके!   आदिवासी समुदाय की व्यवहारों की सुंदरता,उनकी संस्कृति ,प्रकृति के प्रति प्रेम,मिल बाँट,आदर भाव से और प्रकृति संरक्षण,गूढ़ विन्रमता और उनके समानता और नागरिक समन्वय की गहन अनुरक्ति भाव से देश को बहुत कुछ सीखे जाना की आवश्यकता है ! 

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आशिक़ी का “Move On” कांड

आशिक़ी का “Move On” कांड

मनीष पाण्डेय:जयपुर   एक शब्द होता है ‘move on’ इस शब्द का सबसे अधिक अगर कहीं इस्तेमाल हुआ है तो वो हुआ है इश्क के खेल में। लोग एक बार इश्क करते हैं फिर ब्रेक अप होता है और फिर move on कर जाते है। फिर दुबारा इश्क करते हैं, फिर से ब्रेकअप होता है और फिर move on कर जाते हैं। फिर इश्क करते हैं, फिर ब्रेकअप, फिर move on। यह क्रम चलता रहता है जीवन में। सब इश्क करते हैं इस आभासी दुनिया में, हाँ मैंने भी इश्क किया…

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