पैट्रिक की आँखों से दुनिया

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हम सब के जीवन में बहुत सी चीज़ें ऐसी होती हैं जो हमे झकझोर के रख देती हैं और उस घटना के बाद हमारा जीवन पूरी तरह से बदल जाता है I कई लोग बरसों चलते रहते हैं उसके बाद जाकर उन्हें अपने मन मुताबिक काम और नाम मिल पाता है और कई लोग जन्म से इतने ख़ास होते हैं की उनका बाकी का जीवन बहुत ही ख़ास तरीके से बीत जाता है I

ऐसी ही कुछ कहानी है पेट्रिक हेनरी हुग्स की जो बचपन से इतने स्पेशल थे और आज भी उतने ही ख़ास बने हुए हैं और इसका कारण ये है की पेट्रिक हेनरी हुग्स जन्म से ही नेत्रहीन हैं I यही नहीं वो बाइलैटरल एनोपथैलमिया और हिप डिस्प्लासिया बीमारी से पीड़ित हैं। वो खुद से चलफिर सकने में असमर्थ हैं। उनकी रीढ़ में दो स्टील की रॉड लगाई गई हैं ताकि वो बैठ सकें। कहा जा सकता है कि वो एक ऐसे शरीर के साथ जन्मे जिससे वो कुछ भी नहीं कर पाते थे। इतना सब कुछ होने के बावजूद भी पेट्रिक हेनरी हुग्स ने कभी हार नहीं मानी और ना ही उनके परिवार ने हार मानी I लेकिन पेट्रिक के पिता ने पेट्रिक को किसी से कमतर नहीं समझा और उन्हें नौ महीने से ही पियानो पर बिठाकर उसे सीखने की ट्रेनिंग देने लगे। पेट्रिक मीडिया की नजरों में साल 2006 में आए जब उन्हें दुनिया ने यूनिवर्सिटी ऑफ लुईसविले के एक छात्र के रूप में लुईसविले मार्चिंग बैंड का हिस्सा बने देखा। वो व्हीलचेयर पर बैठकर ट्रंपेट बजा रहे थे। आपको जानकर हैरत होगी कि नेत्रहीन और खुद से हिलडुल ना सकने वाले पैट्रिक एक पियानिस्ट हैं, ट्रंपेट भी बजाते हैं और गाना भी गाते हैं। उनके नाम दुनियाभर के कई अवॉर्डस हैं। रोज ही वो लाखों को अपने सफर से प्रेरित करते हैं।

आज पेट्रिक हेनरी हुग्स को सारी दुनिया जानती हैं और ये सब मुमकिन हो पाया ऊनि दृढ़ इच्छाशक्ति से, इसलिए आप भी कभी जब बहुत ज़्यादा घबराने लगे तो ध्यान रखियेगा बहुत लोग ऐसे लड़ रहे हैं जो उन लड़ाईयों को कभी ना जीत पायें I

लेकिन सबसे ज़रूरी है लड़ाई में बने रहना और लड़ते रहना I  

प्रवीण झा 

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